जलवायु

पेड़ शहरों के लिए प्राकृतिक एसी हैं, पर उन्हें सही से लगाने की ज़रूरत है

शहरों में पेड़ तो बढ़ रहे हैं, लेकिन शोधकर्ता अब जाकर समझ रहे हैं कि इनसे शहरों को ठंडा कैसे रखा जाए
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<p><span style="font-weight: 400;">पेड़ लगातार गर्म होते शहरों को ठंडक दे सकते हैं और इससे वहां रहने वालों के स्वास्थ्य में भी सुधार आ सकता है। लेकिन यह उतना आसान नहीं है जितना &#8220;पेड़ लगाओ और ठंडक पाओ&#8221; लगता है (फोटो: इमेज ब्रोकर डॉट कॉम / ऐलमी)</span></p>

पेड़ लगातार गर्म होते शहरों को ठंडक दे सकते हैं और इससे वहां रहने वालों के स्वास्थ्य में भी सुधार आ सकता है। लेकिन यह उतना आसान नहीं है जितना “पेड़ लगाओ और ठंडक पाओ” लगता है (फोटो: इमेज ब्रोकर डॉट कॉम / ऐलमी)

कहावत है कि ‘पेड़ लगाने का सबसे अच्छा समय 20 साल पहले था। दूसरा सबसे अच्छा समय आज है।'”

वायु प्रदूषण को कम करने से लेकर जैव विविधता में सुधार लाने तक, पेड़ों को कई पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के रूप में देखा जाता है। लेकिन आज शहरों में किए जा रहे वृक्षारोपण के पीछे एक बड़ा उद्देश्य भीषण गर्मी के प्रभाव को कम करना है।

जलवायु कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध शहरों के वैश्विक नेटवर्क, C40 सिटीज की अर्बन हीट प्रोजेक्ट ऑफिसर, सैमी राइक्स टोवानी कहती हैं, “हमारे अधिकांश सदस्य शहरों के लिए वर्तमान में भीषण गर्मी मुख्य जोखिम है, जिससे निपटने के लिए प्रमुख गतिविधियों में से एक ‘ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर’ यानी हरित बुनियादी ढांचे को जोड़ना है।”


यह एक CATCH स्टोरी है

यह रिपोर्ट डायलॉग अर्थ की कम्युनिटी अडाप्टेशंस टू सिटी हीट (CATCH) परियोजना का हिस्सा है, जिसे बोस्टन यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर किया जा रहा है। इस परियोजना को वेल्कम से वित्तीय सहायता मिली है। डायलॉग अर्थ की सभी रिपोर्टें संपादकीय रूप से स्वतंत्र हैं।

अनुमान है कि हर साल लगभग पाँच लाख लोगों की मौत गर्मी से संबंधित कारणों से होती है, और इसकी मुख्य वजह हृदय संबंधी समस्याएं हैं। जब शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए त्वचा की ओर बड़ी मात्रा में रक्त संचारित करता है, तो दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यह पहले से ही दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों, विशेषकर बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

यह देखा गया है कि हीटवेव के बार-बार संपर्क में आने से व्यक्ति का शरीर उतनी ही तेजी से बूढ़ा होता है जितनी तेजी से नियमित धूम्रपान और शराब पीने से होता है।

पेड़ अपने आसपास के वातावरण को मुख्य रूप से तीन तरीकों से ठंडा करते हैं। वे छाया देते हैं; वे अपनी पत्तियों से पानी छोड़ते हैं जो वाष्पित होकर गर्मी को सोख लेता है (ठीक वैसे ही जैसे इंसानी पसीना काम करता है); और वे हवा के बहाव को बदलते हैं।

लेकिन शहरी पेड़ों की शीतलन क्षमता को लेकर हमारी समझ में अभी भी काफी कमियां हैं। साथ ही, किसी शहरी क्षेत्र को ठंडा करने में पेड़ों की अलग-अलग प्रजातियां किस तरह काम करती हैं, इसमें भी काफी भिन्नता है। कई मौजूदा आकलन असल में केवल उन विशिष्ट स्थानों और वहां की जलवायु के लिए ही प्रासंगिक हैं।

क्या पेड़ हैं सर्वव्यापी समाधान?

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में 2010 के बाद से जर्नलों में प्रकाशित 182 अध्ययनों का विश्लेषण करके पहला व्यापक वैश्विक आकलन देने की कोशिश की। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि शहरी पेड़ पैदल चलने वालों के स्तर पर हवा का तापमान 12 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकते हैं। अध्ययन किए गए 110 वैश्विक शहरों में से 83% में पेड़ लगाए जाने के बाद, “सबसे गर्म महीने का हवा का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ गया”।

लेकिन यह इतना आसान नहीं है कि किसी भी जगह पर, कोई भी पेड़ लगा दिया जाए और वहां ठंडक हो जाए। शहरों में गर्मी कम करने के लिए पेड़ों की क्षमता का अधिकतम लाभ उठाने हेतु कई कारकों को ध्यान में रखना जरूरी है।

कैम्ब्रिज का अध्ययन पेड़ों की प्रजातियों, शहरी बनावट और जलवायु स्थितियों के महत्व को उजागर करता है। यह अध्ययन यह भी दिखाता है कि ‘गलत जगह पर लगा गलत पेड़’ न केवल तापमान कम करने में विफल हो सकता है, बल्कि रात के समय जमीन से निकलने वाली गर्मी को कैद भी कर सकता है।

शहरों में गर्मी इतनी बड़ी समस्या क्यों है?

अक्सर शहरों का तापमान उनके आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में अधिक होता है। इसके कई कारण हैं, जिनमें छाया और ठंडक देने वाले पेड़ों की कमी; गर्मी सोखने वाली कंक्रीट और ईंट की इमारतें; और ऊर्जा का अधिक उपयोग शामिल है, जिससे ‘वेस्ट हीट’ पैदा होती है। इसे ‘अर्बन हीट आइलैंड’ (UHI) प्रभाव के रूप में जाना जाता है।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के आर्किटेक्चर विभाग में ‘सस्टेनेबल बिल्ट एनवायरनमेंट’ की एसोसिएट प्रोफेसर रोनिता बर्धन कहती हैं, “हमारा अध्ययन इस भ्रम को तोड़ता है कि पेड़ दुनिया भर के तपते शहरों के लिए सर्वव्यापी समाधान हैं।”

अध्ययन में पाया गया कि शहरी पेड़ गर्म और शुष्क जलवायु वाले शहरों को ठंडा करने में सबसे अधिक कारगर हैं, जहां वे 9°C से कुछ अधिक ठंडक देते हैं, हालांकि रात में वे तापमान को 0.4°C तक बढ़ा भी देते हैं। गर्म और आर्द्र जलवायु में पेड़ कम सफल रहे। नाइजीरिया में, पेड़ों ने दिन के दौरान शहरों को 12°C तक ठंडा किया, लेकिन रात में तापमान 0.8°C तक बढ़ा दिया। समशीतोष्ण यानी मध्यम तापमान वाले क्षेत्रों में, दिन की ठंडक 6°C तक सीमित थी, लेकिन रात का तापमान 1.5°C तक बढ़ सकता था।

रोनिता बर्धन ने डायलॉग अर्थ को बताया, “दिन में मिलने वाली भारी ठंडक के बदले रात की गर्मी में मामूली बढ़ोतरी को स्वीकार करना सही है या नहीं, यह फैसला इतना सीधा नहीं है, क्योंकि स्वास्थ्य के लिए रात में राहत  मिलना बहुत महत्वपूर्ण है। यह संदर्भ, संवेदनशीलता और इस बात पर निर्भर करता है कि परिवार खुद को कैसे ढालते हैं।”

वह समझाती हैं कि अधिक खुले और कम ऊंचाई वाली इमारतों वाले शहरों को पेड़ों से अधिक लाभ होता है, क्योंकि वहां हवा के फैलाव और बहाव के लिए अधिक जगह होती है। सघन शहरी बनावट में, सदाबहार पेड़ सबसे अच्छा विकल्प हो सकते हैं क्योंकि वे साल भर छाया प्रदान करते हैं।

साक्ष्य बताते हैं कि जहां पेड़ों की प्रजातियों का चयन उचित रूप से किया जाता है, वहां वे जितना अधिक क्षेत्र कवर करते हैं – जिसे ‘कैनोपी कवर’ कहा जाता है – शीतलन प्रभाव उतना ही अधिक होता है।

कार्डिफ यूनिवर्सिटी और चाइनीज यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग, शेन्ज़ेन का एक प्रकाशनाधीन अध्ययन बताता है कि कार्डिफ में जमीनी स्तर पर 24°C का औसत तापमान, 1% के मामूली ट्री कैनोपी कवर के साथ गिरकर 22°C, 15% कवर के साथ 20°C, और 38% कवर के साथ 19.7°C हो जाएगा।

line of trees between buildings in city centre
कार्डिफ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कार्य दर्शाता है कि शहरों में अधिकतम ठंडक पाने के लिए कभी-कभी बहुत अधिक पेड़ों की आवश्यकता हो सकती है। (फोटो: जेफ मॉर्गन 06 / ऐलमी)

अध्ययन के सह-लेखक और कार्डिफ में आर्किटेक्चरल साइंस के प्रोफेसर फिलिप जोन्स बताते हैं, “तापमान कम करने के लिए कोई भी पेड़ उपयोगी है, लेकिन अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए आपको काफी बड़े क्षेत्रों को पेड़ों से कवर करने की आवश्यकता है।”

अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य के मध्यम आकार के शहर, मैडिसन में 2019 में हुए एक अध्ययन से भी इस निष्कर्ष की पुष्टि होती है। इसमें पाया गया कि सबसे अधिक शीतलन तब हुआ जब कैनोपी कवर 40% से अधिक था।

असमानता से निपटना

भीषण गर्मी से सबसे संवेदनशील लोगों को बचाने के लिए, शहरों को इस बात पर गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है कि नए पेड़ कहां लगाए जाएं।

पार्कों वाले हरे-भरे इलाके अक्सर सबसे पसंदीदा और महंगे होते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि सबसे गरीब लोग उन इलाकों में रहने को मजबूर होते हैं जहां हरियाली सबसे कम होती है, जिससे यह असमानता और गहरी होती है।

पर्यावरण गैर-लाभकारी संस्था ‘द नेचर कंजरवेंसी’ द्वारा 2021 में किए गए एक अध्ययन में लगभग 6,000 समुदायों का आकलन किया गया। इसमें पाया गया कि अमेरिका में 92% मामलों में, कम आय वाले मोहल्लों में अधिक आय वाले इलाकों की तुलना में वृक्ष आवरण कम था।

टोवानी कहती हैं, “मेक्सिको के ग्वादलहारा जैसे C40 के सदस्य शहरों ने ख़ासकर उन इलाकों में वृक्षारोपण का लक्ष्य रखा है, जहाँ की आबादी को भीषण गर्मी से सबसे अधिक खतरा है।”

इसके लिए वे ‘वल्नरेबिलिटी मैपिंग’ नामक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, जिसके तहत हीट मैप यानी शहरी गर्मी के नक्शों को जनसांख्यिकीय डेटा के साथ मिलाया जाता है।

जहाँ यह तय हो जाए कि ठंडक के लिए पेड़ एक अच्छा विकल्प हैं, वहाँ भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे शहरों के लिए पैसा इस रास्ते में बड़ी बाधा बन सकता है। अब शहर पेड़ों के लिए फंड जुटाने के लिए कई तरह के नवीन समाधान अपना रहे हैं।

सिएरा लियोन के फ्रीटाउन में, अधिकारी हीट-स्ट्रेस (गर्मी से होने वाले तनाव) सहित कई पर्यावरणीय मुद्दों से निपटने के लिए 2030 तक 50 लाख पेड़ लगाने की उम्मीद कर रहे हैं। शहर की ‘फ्रीटाउन द ट्रीटाउन’ पहल निवासियों को पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए पैसे देती है। इन पौधों को जियोटैग किया जाता है ताकि उनकी प्रगति को ट्रैक करने में मदद मिल सके।

इस परियोजना को आंशिक रूप से बहुपक्षीय वित्तपोषण संस्थान ‘ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी’ द्वारा वित्तपोषित किया गया है, लेकिन शहर स्वैच्छिक कार्बन बाजारों के माध्यम से अतिरिक्त निवेश हासिल करने पर भी विचार कर रहा है।

कोलंबिया में, मेडेलिन शहर ने वंचित तबकों से आने वाले नागरिकों को 30 “ग्रीन कॉरिडोर” में 8,800 पेड़ लगाने के लिए प्रशिक्षित किया है। इन हरित गलियारों को शहर के तापमान में 2°C की कमी लाने का श्रेय दिया जाता है।

वैकल्पिक उपाय?

कुछ मामलों में, शहरी गर्मी के लिए पेड़ सबसे उपयुक्त समाधान नहीं हो सकते, भले ही वे सैद्धांतिक रूप से तापमान में सबसे बड़ी कमी लाते हों। बोस्टन यूनिवर्सिटी के जुलाई 2025 के एक अध्ययन में पेड़ों की तुलना शीतल छतों यानी कूल रूफ से की गई, जिन्हें खास तरीकों से सूरज की रोशनी को परावर्तित करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। उदाहरण के लिए, इन तरीकों में उन्हें सफेद पेंट से रंगना हो सकता है।

यह अध्ययन बताता है कि बोस्टन में ट्री कैनोपी (वृक्ष वितान) बढ़ाने से तापमान में होने वाली कमी, कूल रूफ लगाने से होने वाली कमी की तुलना में 35% अधिक थी। हालाँकि, औसतन कूल रूफ में लोगों को गर्मी से बचाने की अधिक क्षमता थी, क्योंकि उन्हें शहर के उन हिस्सों में लगाने के ज़्यादा मौके थे जहाँ आबादी सबसे अधिक संवेदनशील थी, पर वहाँ पेड़ लगाने के लिए जगह बेहद सीमित थी।

बोस्टन यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ एंड एनवायरनमेंट के शोधकर्ता इयान स्मिथ बताते हैं, “शोध टीम अब यह पता लगाने पर काम कर रही है कि अलग-अलग जलवायु में पेड़ों की शीतलन दक्षता कैसे बदलती है, और किन अन्य कारकों को ध्यान में रखने की आवश्यकता है।”

“आने वाले दशकों में बहुत से शहरों के लिए पेड़ों की आपातकालीन सिंचाई की योजना बनाना एक बड़ा रुझान होगा।“
रॉब मैकडॉनल्ड , टीएनसी में ‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’ के लीड साइंटिस्ट

वे बताते हैं कि बात सिर्फ गर्मी की नहीं है। पेड़ मानसिक स्वास्थ्य, बाढ़ की रोकथाम, जैव विविधता और हवा की गुणवत्ता के लिए भी फायदेमंद होते हैं। वह आगे कहते हैं, “शहर में गर्मी कम करने के लिए ट्री कैनोपी का विस्तार सबसे अच्छा समाधान है या नहीं, यह तय करते समय इन सभी अलग-अलग पहलुओं के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।”

पानी इसमें बेहद महत्वपूर्ण पहलू है।

स्मिथ कहते हैं, “कई सबसे गर्म स्थान, सबसे सूखे इलाके भी हो सकते हैं। वहाँ अर्बन कैनोपी (शहरी पेड़ों) की सेहत और उससे मिलने वाली ठंडक को बनाए रखने के लिए… हमें स्थानीय जल आपूर्ति पर भारी दबाव डालना पड़ सकता है। यह बात इन फैसलों को थोड़ा और जटिल बना देती है।”

टीएनसी के शोध के अनुसार, 61 बड़े शहरों में ‘ट्री कैनोपी कवर’ (वृक्ष वितान आवरण) को उसकी अधिकतम क्षमता तक बढ़ाने से पानी की कुल मांग में सालाना 320 करोड़ क्यूबिक मीटर की वृद्धि हो जाएगी।

वहीं, अगर जगह के हिसाब से उपयुक्त और सूखे को झेलने वाली प्रजातियां लगाई जाएं, तो पानी की इस मांग को घटाकर 1,50 करोड़ क्यूबिक मीटर प्रति वर्ष तक लाया जा सकता है।” इन गणनाओं के गलत होने के परिणाम 2011 में टेक्सास के शहरों में स्पष्ट रूप से देखे गए, जब सूखे के कारण अनुमानित 56 लाख पेड़ मर गए, जो वहां की शहरी ‘ट्री कैनोपी’ का लगभग 10% हिस्सा था। इन्हें हटाने के लिए प्रशासन को 5,000 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े।

टीएनसी में ‘नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस’ के लीड साइंटिस्ट रॉब मैकडॉनल्ड कहते हैं, ‘इसलिए, जो लोग शहरों में वृक्ष आवरण बढ़ाने का लक्ष्य रख रहे हैं, उन्हें इस पर भी विचार करना होगा कि वे पानी की कमी से कैसे निपटेंगे।’

वह आगे कहते हैं कि जहां सिंचाई अनिवार्य है, वहां पानी के वैकल्पिक स्रोतों की आवश्यकता होगी, जैसे कि अपशिष्ट जल या स्टॉर्मवाटर (वर्षा, बर्फबारी या पिघलती बर्फ से प्राप्त अतिरिक्त जल) का पुन: उपयोग करना।

मैकडॉनल्ड कहते हैं, “आने वाले दशकों में कई शहरों के लिए एक बड़ा रुझान पेड़ों की आपातकालीन सिंचाई की योजना बनाना होगा। आपको यह सोचना होगा कि आपके पास जो कैनोपी पहले से मौजूद है, उसे कैसे सुरक्षित रखा जाए।”

पेड़ों को परिपक्व होने और छाया व ठंडक देने लायक बड़ा होने में दशकों लग सकते हैं। जैसे-जैसे धरती का तापमान बढ़ रहा है, लोगों को ठंडा और स्वस्थ रखने के लिए मौजूदा शहरी पेड़ों की देखभाल करने के साथ-साथ, उचित परिस्थितियों में नए पेड़ लगाने की भी आवश्यकता होगी, ताकि वे आने वाले दशकों तक लोगों को ठंडक पहुंचाते रहें।

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