जलवायु

गर्मी जलवायु परिवर्तन के अन्य स्वास्थ्य प्रभावों को बढ़ा रही है

जैसे-जैसे गर्मी बढ़ते जा रहे अन्य जलवायु संकटों के साथ मिलकर असर डाल रही है, वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ये घटनाएँ एक-दूसरे के प्रभाव को कैसे बढ़ाती हैं और शहर इसके अनुकूल कैसे ढल सकते हैं।
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<p>जुलाई 2026 के अंतिम दिनों में लू के दौरान दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के सौमोस के पास चीड़ के जंगल में लगी आग। विज्ञान अब लगातार अधिक स्पष्ट तस्वीर पेश कर रहा है कि किस तरह अत्यधिक गर्मी, जलवायु से जुड़ी अन्य तेज होती घटनाओं, जैसे जंगल की आग, के साथ मिलकर मानव स्वास्थ्य के लिए ऐसे बड़े जोखिम पैदा कर सकती है, जो इनमें से किसी एक घटना के अकेले होने पर पैदा नहीं होते। (फोटो: फैब्रिस सैप्ट / अबाका प्रेस / अलामी)</p>

जुलाई 2026 के अंतिम दिनों में लू के दौरान दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के सौमोस के पास चीड़ के जंगल में लगी आग। विज्ञान अब लगातार अधिक स्पष्ट तस्वीर पेश कर रहा है कि किस तरह अत्यधिक गर्मी, जलवायु से जुड़ी अन्य तेज होती घटनाओं, जैसे जंगल की आग, के साथ मिलकर मानव स्वास्थ्य के लिए ऐसे बड़े जोखिम पैदा कर सकती है, जो इनमें से किसी एक घटना के अकेले होने पर पैदा नहीं होते। (फोटो: फैब्रिस सैप्ट / अबाका प्रेस / अलामी)

यूरोप में हाल में पड़े रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी के दौर इस बात की गंभीर चेतावनी हैं कि अत्यधिक गर्मी कितनी खतरनाक हो सकती है। जून के अंत में लगातार सात दिनों की एक अवधि के दौरान, यूरोपीय मृत्यु-दर निगरानी नेटवर्क के अनुसार, इस क्षेत्र में 10,000 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं। वैज्ञानिक अब तक इस असामान्य बढ़ोतरी को केवल तापमान में हुई वृद्धि से ही जोड़ पाए हैं।

लेकिन इन घटनाओं के दौरान होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ अब तेजी से केवल गर्मी की वजह से नहीं हो रही हैं।

यह कैच परियोजना की कहानी है

यह कहानी बोस्टन विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी में डायलॉग अर्थ द्वारा शहरों में गर्मी के अनुकूल सामुदायिक उपाय (कैच) परियोजना के तहत किए जा रहे कार्य का हिस्सा है। इस परियोजना को वेलकम से वित्तीय सहायता प्राप्त है। डायलॉग अर्थ की सभी सामग्री संपादकीय रूप से स्वतंत्र है।

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हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने यह समझने की दिशा में अधिक स्पष्ट तस्वीर विकसित करना शुरू किया है कि अत्यधिक गर्मी किस तरह चक्रवात, जंगल की आग और ओजोन प्रदूषण जैसे अन्य पर्यावरणीय खतरों के साथ मिलकर असर डालती है। उनके शोध से संकेत मिलता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी संयुक्त घटनाएँ अधिक आम होती जा रही हैं और इनके कारण स्वास्थ्य पर पड़ने वाले जोखिम भी प्रत्येक घटना के अलग-अलग होने की तुलना में अधिक होते हैं।

तूफान से बुनियादी ढांचे को होने वाला नुकसान और रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाला व्यवधान लोगों की गर्मी से निपटने की क्षमता को कमजोर करता है। वहीं, अत्यधिक गर्मी स्वयं आपदा के बाद राहत और पुनर्बहाली के प्रयासों में बाधा डाल सकती है। जंगल की आग प्राकृतिक परिदृश्यों को तबाह कर देती है, जबकि उनसे निकलने वाला धुआँ कई किलोमीटर दूर तक गर्मी के प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभावों को और बढ़ा देता है।

“गर्मी का असर धीरे-धीरे और घातक तरीके से होता है,” वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट के रॉस सेंटर फॉर सस्टेनेबल सिटीज के वरिष्ठ फेलो कर्ट शिकमैन कहते हैं।

“यह लोगों की अन्य आपदाओं का सामना करने की क्षमता को कम कर देती है।”

तूफान और गर्मी: समाधान के तौर पर आपदा-रोधी क्षमता

अगस्त 2021 में तूफान इडा ने अमेरिका में दस्तक दी। इस श्रेणी-4 के उष्णकटिबंधीय चक्रवात के साथ तेज हवाएँ, भारी बारिश और तूफानी लहरें आईं, जिसने लुइसियाना और मिसिसिपी राज्यों को प्रभावित किया। इसने 16 साल पहले आए तूफान कैटरीना से हुई तबाही की कड़वी यादें भी ताजा कर दीं।

इडा की तेज हवाओं और बाढ़ के पानी के सीधे प्रभाव के कारण छह लोगों की मौत हुई। लेकिन इस चक्रवात ने एक अप्रत्यक्ष और संयुक्त प्रभाव के जरिए इससे कहीं अधिक लोगों की जान ली।

तूफान इडा ने लुइसियाना के इतिहास में सबसे बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति बाधित की। अमेरिका के दक्षिणी राज्यों अर्कांसस, मिसिसिपी, टेक्सास और लुइसियाना में बिजली की आपूर्ति करने वाली कंपनी एंटरजी ने बताया कि करीब 30,000 बिजली के खंभे गिर गए थे। इसके चलते अमेरिका के आठ राज्यों में कम से कम 12 लाख घरों की बिजली घंटों, और कुछ मामलों में कई दिनों तक, गुल रही। लुइसियाना में कुछ लोगों के लिए यह बिजली कटौती कई दिनों से बढ़कर कई हफ्तों तक चली गई।

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दक्षिणी अमेरिका के न्यू ऑरलियन्स शहर में 2021 में तूफान इडा के बाद बिजली कटौती के दौरान एक व्यक्ति टॉर्च की रोशनी में खरीदारी करता हुआ। (फोटो: एरिक गे / एसोसिएटेड प्रेस / अलामी)

उन्हीं हफ्तों के दौरान एक भीषण गर्मी की लहर ने दस्तक दी। हीट इंडेक्स यानी ताप सूचकांक—जो हवा के तापमान और सापेक्ष आर्द्रता को मिलाकर यह बताता है कि तापमान वास्तव में कितना महसूस होता है—37.8 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया।

लाखों घरों में बिजली नहीं थी और लोग एयर कंडीशनर नहीं चला पा रहे थे। ऐसे में गर्मी शुरुआती चक्रवात से भी अधिक घातक साबित हुई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 13 लोगों की मौत “इडा के बाद गर्मी से हुई थकावट” के कारण हुई।

बुनियादी ढांचे को सीधे नुकसान पहुंचाने के अलावा, गर्मी शहरों के बिजली ग्रिड पर भी दबाव बढ़ाती है। एयर कंडीशनिंग की मांग बढ़ने से बिजली की खपत तेजी से बढ़ जाती है, जबकि बिजली की केबलें गर्म होकर कम बिजली वहन कर पाती हैं। अमेरिका में बिजली कटौती पर संयुक्त मौसम संबंधी घटनाओं और गर्मी की लहरों के प्रभाव के एक विश्लेषण में पाया गया कि इन दोनों का संयुक्त दबाव अक्सर “क्रमिक विफलताओं और लंबे समय तक चलने वाली बहाली प्रक्रिया” का कारण बनता है।

इन समस्याओं को पेड़ों से पत्तियाँ झड़ने की घटना (डिफोलिएशन) और बढ़ा देती है। तूफान की तेज हवाएँ पेड़ों से पत्तियाँ गिरा देती हैं या कई बार पेड़ों को पूरी तरह उखाड़ देती हैं। इसके परिणामस्वरूप छाया कम हो जाती है और वाष्पोत्सर्जन भी घटता है। वाष्पोत्सर्जन वह प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसके जरिए पेड़ आसपास की हवा को ठंडा करते हैं। शोध से पता चला है कि इससे इलाकों में खतरनाक गर्मी का जोखिम बढ़ जाता है।

2023 के एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया कि तूफान लॉरा के बाद लुइसियाना के कैमरून के निवासियों ने, सामान्य पत्तियों वाले एक काल्पनिक परिदृश्य की तुलना में, 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक हीट इंडेक्स तापमान का सामना अतिरिक्त 24 घंटे तक किया। यह प्रभाव खास तौर पर रात के समय अधिक स्पष्ट पाया गया।

आपदा राहतकर्मी चक्रवात और गर्मी की इस संयुक्त मार के प्रति खास तौर पर संवेदनशील होते हैं। उन्हें सीमित आराम और छांव के बीच, सुरक्षा उपकरणों के कारण शरीर को ढकने वाली पोशाक पहनकर घंटों बाहर शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है। तूफान बेरिल के बाद राहत एवं बचावकर्मियों के लिए काम करने की परिस्थितियाँ कई बार कार्यस्थल पर गर्मी से संबंधित सुरक्षा की निर्धारित सीमाओं से भी अधिक पाई गईं।

A firefighter takes a drink of water while battling a wildfire
जुलाई 2026 में दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के बोर्डो के पास जंगल की आग से जूझते हुए पानी पीने के लिए कुछ देर रुकता एक दमकलकर्मी। (फोटो: एमा दा सिल्वा / एसोसिएटेड प्रेस / अलामी)

अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में गर्मी से जुड़े विषयों की विशेषज्ञ पेट्रीशिया फैबियन कहती हैं कि चक्रवात के बाद बिजली कटने से लोगों को केवल गर्मी के तनाव का ही खतरा नहीं रहता। भोजन और पानी की आपूर्ति अनियमित हो जाती है; जिन दवाओं को ठंडे तापमान में रखना जरूरी होता है, वे जल्द ही इस्तेमाल के लायक नहीं रह जातीं। कई दिनों तक बनी रहने वाली उमस भरी गर्मी के दौरान लोग ठंडक पाने के लिए झीलों और नदियों में तैरने जाने की अधिक संभावना रखते हैं। लेकिन भारी बारिश के कारण जब बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था चरमरा जाती है, तो इन जलस्रोतों के सीवेज से दूषित होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

“इसका परिणाम पेट और आंत से जुड़ी बीमारियों के मामलों में अचानक बढ़ोतरी के रूप में सामने आता है,” वह बताती हैं।

अतीत में चक्रवात और गर्मी की लहर का इस तरह एक साथ आना अपेक्षाकृत दुर्लभ रहा है, लेकिन जलवायु के गर्म होने के साथ इनके और अधिक बार होने की आशंका है। 2019 में नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि किसी बड़े उष्णकटिबंधीय चक्रवात के आने के बाद 30 दिनों के भीतर 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हीट इंडेक्स तापमान दर्ज होने की घटना ऐतिहासिक रूप से हर 30 वर्षों में लगभग तीन बार हुई है।

यदि अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में गर्मी की लहरें अधिक बार और अधिक तीव्र होती जाती हैं, तो वैश्विक औसत तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की स्थिति में ऐसी घटनाएँ हर 30 वर्षों में सात बार तक हो सकती हैं। 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि पर यह संख्या बढ़कर 11 बार हो सकती है। अध्ययन के अनुसार, यदि वैश्विक तापमान में औसतन 4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होती है, तो ऐसी घटनाएँ “कम से कम हर साल” हो सकती हैं।

ऐसी स्थिति में बिजली की आपूर्ति बनाए रखना लोगों की जान बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग विशेषज्ञ निंग लिन बताती हैं कि “बिजली के बुनियादी ढांचे का बेहतर रखरखाव” शहरों को तूफान के दौरान बिजली कटौती के प्रति कम संवेदनशील बना सकता है। बिजली की लाइनों पर पेड़ों और उनकी शाखाओं का गिरना सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। इसलिए, उनके अनुसार, शहर प्रशासन और बिजली ग्रिड संचालक केबलों को भूमिगत बिछाकर, पुराने या क्षतिग्रस्त बिजली के खंभों की नियमित जांच करके और पेड़ों की छंटाई कर इस जोखिम को कम कर सकते हैं।

कुछ शहरों के निवासी गर्मी से निपटने के लिए अपने स्तर पर भी उपाय कर रहे हैं। लुइसियाना का न्यू ऑरलियन्स शहर कैटरीना और इडा, दोनों तूफानों से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इसलिए कम्युनिटी लाइटहाउस प्रोजेक्ट के तहत स्थानीय सामुदायिक इमारतों में सौर पैनल और बैटरियाँ लगाई जा रही हैं, ताकि बिजली का ग्रिड ठप होने की स्थिति में ये केंद्र स्थानीय लोगों की मदद कर सकें।

शिकमैन के अनुसार, जब गर्मी और अन्य आपदाएँ एक साथ आती हैं, तो बिजली कटौती की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में निष्क्रिय शीतलन उपायों—जैसे छाया की व्यवस्था करना, सड़कों के किनारे पेड़ लगाना और इमारतों में गर्मी परावर्तित करने वाली सामग्री का इस्तेमाल करना—को अपनाने का तर्क और भी मजबूत हो जाता है।

वह चाहते हैं कि स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी भवन नियमों के जरिए निष्क्रिय शीतलन सुविधाओं को इस बात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाए कि किसी इमारत को कानूनी रूप से सुरक्षित माना जाए। इससे इन सुविधाओं का दर्जा अग्निशामक यंत्रों और धुएँ का पता लगाने वाले अलार्म के बराबर हो जाएगा।

“यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हमारा ध्यान इस पर हो—क्योंकि बिजली की जरूरत के बिना भी यह काम करता है,” शिकमैन कहते हैं।

“हमें अपने समुदायों और इमारतों को जितना संभव हो सके, उतना ठंडा और सुरक्षित रखना होगा। [निष्क्रिय शीतलन के बावजूद] इमारतें पूरी तरह ठंडी नहीं रहेंगी, लेकिन वे उस इमारत की तुलना में अधिक सुरक्षित होंगी, जो लगातार गर्मी सोखती रही हो।”

गर्मी और जंगल की आग: चेतावनी के संकेत

अत्यधिक गर्मी और जंगल की आग का मेल भी एक खतरनाक स्थिति पैदा करता है। जब गर्म मौसम के साथ असामान्य रूप से लंबे समय तक कम बारिश या सूखे की स्थिति बनी रहती है, तो हाल के वर्षों में आग की घटनाओं में बढ़ोतरी में गर्मी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

जंगल की आग अपने आप में भी जानलेवा हो सकती है। 2025 में अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया में लगी विनाशकारी आग की एक श्रृंखला के कारण 3 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और 90 से अधिक लोगों की मौत हुई। लेकिन इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि गर्मी और धुएँ का स्वास्थ्य पर “परस्पर प्रभाव बढ़ाने वाला” नकारात्मक असर पड़ता है।

जंगल की आग से जुड़े स्वास्थ्य प्रभावों का एक प्रमुख कारण बारीक कणों वाले प्रदूषकों को सांस के जरिए अंदर लेना है—यानी ऐसे कण जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है। गर्मी और धुएँ का सांस के जरिए शरीर में जाना, दोनों ही हृदय और श्वसन संबंधी समस्याओं में योगदान करते हैं। जब दोनों का सामना एक साथ होता है, तो जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। जंगल की आग से उठने वाला धुआँ सैकड़ों मील दूर स्थित शहरों तक पहुंचकर वहां की हवा को भी प्रदूषित कर सकता है।

2024 में अमेरिका के शोधकर्ताओं ने कैलिफोर्निया में 2006 से 2019 के बीच एकत्र किए गए उपग्रह, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण प्रकाशित किया। उन्होंने पाया कि जिन इलाकों में एक ही दिन अत्यधिक गर्मी—यानी जब हीट इंडेक्स ऐतिहासिक गर्मियों के 85% दिनों की तुलना में अधिक था—और जंगल की आग के धुएँ का खतरनाक स्तर दोनों मौजूद थे, वहां हृदय और श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती होने के मामले उन दोनों खतरों के अलग-अलग जोखिमों को जोड़कर लगाए गए अनुमान से भी अधिक थे।

Two Protection Civile workers walk through a large hall filled with cots, wheelchairs, and people resting under black tents in a temporary shelter.
फ्रांस में 2026 की गर्मियों में लगी जंगल की आग के दौरान निकाले गए ग्रामीणों को ठहराने के लिए बोर्डो प्रदर्शनी केंद्र के अंदर बनाया गया एक आपातकालीन आश्रय स्थल। (फोटो: एंटोनिन बुरा / ले पिक्टोरियम / अलामी)

अध्ययन की लेखिका और अमेरिका में यूसीएलए फील्डिंग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में पर्यावरणीय बदलाव और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संबंधों पर काम करने वाली मिरियम मार्लियर कहती हैं कि कुछ इलाकों में यह प्रभाव अधिक स्पष्ट था। जोखिम वाले इन इलाकों में ऐसे कारक पाए गए, जो शहरी गर्मी का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों के लिए पहले से परिचित हैं।

वह कहती हैं, “स्थानीय स्तर पर पेड़ों से ढके क्षेत्र का कम होना, स्थानीय आय का स्तर और स्वास्थ्य बीमा की कम उपलब्धता—इन सभी का संबंध गर्मी और धुएँ के संयुक्त प्रभाव के अधिक होने से था।”

इमारतों को गर्मी का बेहतर ढंग से सामना करने के लिए तैयार करना इस समस्या से निपटने में मदद कर सकता है। लेकिन जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम लोगों को आने वाले खतरों के बारे में समय रहते चेतावनी देना है।

अमेरिका में गर्मी की लहरों और वायु प्रदूषण के लिए चेतावनी जारी करने की जिम्मेदारी दो अलग-अलग सरकारी एजेंसियों की है। मार्लियर का कहना है कि गर्मी की लहरों और जंगल की आग से उठने वाले धुएँ के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को लेकर पहले से जारी की जाने वाली सार्वजनिक चेतावनियाँ अक्सर “एक-दूसरे के विपरीत” होती हैं।

वह समझाती हैं, “अगर गर्मी है, तो आपको खिड़कियाँ खोलने, बाहर जाने और ठंडक पाने की कोशिश करने की सलाह दी जाती है। लेकिन जब हवा में धुआँ हो, तो आपको क्या कहा जाता है? आपको सब कुछ बंद रखने, घर के अंदर रहने और अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए घर के अंदर की हवा को जितना संभव हो सके साफ रखने की सलाह दी जाती है। लेकिन जब गर्मी भी हो और धुआँ भी, तब आप क्या करें?”

मार्लियर और उनके सहयोगियों का सुझाव है कि जब गर्मी और जंगल की आग के धुएँ, दोनों का पूर्वानुमान हो, तो संयुक्त चेतावनियाँ जारी की जानी चाहिए। साथ ही, लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले अधिक जोखिम को ध्यान में रखते हुए चेतावनी जारी करने की सीमा भी कम रखी जानी चाहिए।

शिकमैन इससे सहमत हैं। वह कहते हैं, “समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियों तक लोगों की पहुंच बेहद महत्वपूर्ण है।”

उनका तर्क है कि इन चेतावनियों में मौसम की भौतिक विशेषताओं पर नहीं, बल्कि उसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वह कहते हैं, “हम किसी तूफान के खतरे का आकलन जिस तरह करते हैं, उसका इंसानों पर पड़ने वाले असर से कोई सीधा संबंध नहीं होता। हम तूफान में समुद्री जल के उफान की बात नहीं करते, बल्कि हवा की गति की बात करते हैं [हालांकि नुकसान अधिकतर समुद्री उफान से होता है]। गर्मी के मामले में स्थिति और भी खराब है। यहां भी हम सिर्फ तापमान की बात करते हैं, जबकि इससे वास्तव में यह पता नहीं चलता कि लोगों के लिए खतरा कितना बड़ा है।”

वह स्पेन के सेविया शहर का उदाहरण देते हैं, जहाँ इसी सोच के आधार पर गर्मी की लहरों के लिए चेतावनी जारी करने का एक नया तरीका आजमाया गया है। 2022 में शहर प्रशासन ने शोधकर्ताओं के साथ मिलकर कई दशकों के स्थानीय मौसम संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि केवल तापमान ही नहीं, बल्कि मौसम की कौन-सी परिस्थितियाँ गर्मी से होने वाली सबसे अधिक मौतों से जुड़ी थीं। इन निष्कर्षों के आधार पर सार्वजनिक चेतावनी प्रणाली को नए सिरे से तैयार किया गया। गर्मियों के अंत तक इस प्रणाली ने गर्मी की ऐसी दो संभावित रूप से खतरनाक लहरों की पहचान की, जिन्हें स्पेन की मौसम एजेंसी एईएमईटी ने चेतावनी के लिए चिह्नित नहीं किया था।

पिछले साल न्यूयॉर्क में एक गैर-लाभकारी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता ने व्यक्तिगत रूप से गर्मी की चेतावनी देने के लिए एक एआई एजेंट के इस्तेमाल का प्रयोग किया। “रेचल” नाम की इस प्रणाली ने अधिक गर्मी के जोखिम वाले इलाकों में रहने वाले 17,000 ग्राहकों से टेक्स्ट चैट या फोन कॉल के जरिए संपर्क किया और उन्हें गर्मी से सुरक्षित रहने की सलाह दी। इसमें यह पूछना भी शामिल था कि क्या उनके पास एयर कंडीशनिंग और ठंडा पानी उपलब्ध है। कंपनी के अनुसार, नियंत्रण समूह की तुलना में इस समूह में अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में 47% की कमी दर्ज की गई।

छिपे हुए दुष्प्रभाव

जैसा कि यूरोप अब देख रहा है, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चरम मौसमी घटनाएँ आपस में एक-दूसरे से जुड़ते हुए जोखिमों को अधिक आम बना रही हैं। लेकिन शिकमैन चेतावनी देते हैं कि इसके पीछे एक और अधिक गंभीर और धीरे-धीरे बढ़ने वाली समस्या है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए: लगातार बनी रहने वाली, दीर्घकालिक गर्मी।

“जब गर्मी किसी शहर को अपनी चपेट में लेती है, तो इसका एक छिपा हुआ सिलसिला शुरू हो जाता है। दिन-रात लगातार बनी रहने वाली गर्मी की तीव्रता ऐसे कई दुष्प्रभाव पैदा करती है, जिन्हें हमेशा गर्मी से नहीं जोड़ा जाता, जबकि उनकी असली वजह गर्मी ही होती है।

“अगर गर्मी के कारण किसी व्यक्ति की सीखने और शैक्षिक क्षमता प्रभावित होती है, तो उसका असर पूरी जिंदगी बना रह सकता है। क्या यह तूफान के साथ आने वाली कोई बड़ी और सुर्खियाँ बटोरने वाली गर्मी की लहर है? नहीं। लेकिन फिर भी यह एक आपदा है।”

जैसे-जैसे दुनिया लगातार गर्म होती जा रही है, अधिक से अधिक लोगों को संयुक्त आपदाओं के नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों का सामना करना पड़ेगा। इससे शहरों की सरकारों और कंपनियों के लिए गर्मी को एक गंभीर स्वास्थ्य खतरे के रूप में पहचानना और उससे निपटने के लिए संसाधन समर्पित करना और भी जरूरी हो जाता है।

शिकमैन कहते हैं कि शहरों को अत्यधिक गर्मी के अनुकूल बनाने के लिए कम तकनीक वाले कई उपाय आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन असली चुनौती निवेश जुटाना है।

“मामला बैंक और बोर्डरूम में बैठे लोगों तक पहुंचता है। नवाचार और सोच में बदलाव की जरूरत वहीं है।”

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